"अवसाद से बचना है तो शतरंज खेलें" - धर्मेंद्र कुमार
17/06/2020 -सुशांत सिंह के आत्महत्या ने कई सवाल छोड़ दिये हैं। बहुत से कारणों पर कयास लगाया जा रहे है। आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। सहानुभूति के नाम पर राजनीति भी अपने शबाब पर है। पर ये सब कब तक ?? दो दिन में कोई नया "विषय" भुला देगा इस घटना को। और हमारे लिये सुशांत स्मृतियों में रह जाएंगे। अंततः, जानेवाला तो चला गया........... समस्याओं अंतहीन है और इससे कोई बच नही सकता। अंतर्राष्ट्रीय निर्णायक धर्मेंद्र कुमार के लिखे इस लेख में आप पढे कैसे वह मानते है की बच्चो को शतरंज सिखाना उन्हे अवसाद से बचने का एक टीका देने जैसा है !